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शपथ लेते ही एक्शन में CM सम्राट चौधरी, सचिवालय पहुंचकर अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

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बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शपथ लेते ही सचिवालय में अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक कर प्रशासन को तेज करने के निर्देश दिए। विकास, कानून-व्यवस्था और जन समस्याओं के त्वरित समाधान पर फोकस।

पटना/आलम की खबर:बिहार की सियासत में हुए बड़े बदलाव के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही अपनी कार्यशैली का स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उनकी सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि जमीन पर परिणाम देने के लिए तेजी से काम करेगी। 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद ही उन्होंने प्रशासनिक तंत्र को एक्टिव मोड में लाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीधे पटना स्थित सचिवालय का रुख किया, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय में विधिवत कार्यभार ग्रहण किया और बिना किसी देरी के राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक शुरू कर दी। इस पूरी प्रक्रिया ने यह साफ कर दिया कि नई सरकार शुरुआत से ही कामकाज में गति और सख्ती दोनों लाने के मूड में है और शासन व्यवस्था को पहले दिन से ही पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री के सचिवालय पहुंचते ही प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई और विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव तथा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तत्काल बैठक के लिए जुटे। इस बैठक में राज्य की मौजूदा प्रशासनिक स्थिति, लंबित विकास योजनाओं की प्रगति, विभागों की कार्यशैली और आने वाले समय की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता जनता से जुड़े मुद्दों का त्वरित समाधान है और इसके लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिया कि हर विभाग अपने काम को तय समयसीमा के भीतर पूरा करे और किसी भी योजना में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार की छवि तभी बेहतर बनेगी जब आम लोगों को सरकारी व्यवस्था से राहत मिलेगी और उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जन शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए ताकि लोगों का भरोसा शासन पर मजबूत हो सके। इसके साथ ही उन्होंने डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाए, जिससे लोगों को घर बैठे सुविधाएं मिल सकें और भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम हों।

बैठक में मुख्यमंत्री ने खास तौर पर सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सुधार के बिना राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है, इसलिए सभी संबंधित विभाग प्राथमिकता के आधार पर काम करें। उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए अस्पतालों की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए और सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। कानून-व्यवस्था को लेकर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि अपराध पर नियंत्रण के लिए प्रभावी रणनीति बनाई जाए और अपराधियों के खिलाफ त्वरित तथा सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि आम लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हो।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की और जिन परियोजनाओं में देरी हो रही है, उनके लिए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ सीधे जनता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए और नियमित रूप से उनकी मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नई योजनाओं के प्रस्ताव तैयार करते समय जनता की जरूरतों और राज्य के समग्र विकास को ध्यान में रखा जाए, ताकि योजनाएं प्रभावी और उपयोगी साबित हों।

मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि उनकी सरकार में जवाबदेही और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने कार्यों के प्रति पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करें, क्योंकि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक लागू करना है। इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, तभी विकास का सही अर्थ पूरा होगा।

शपथ ग्रहण के तुरंत बाद जिस तरह से मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय किया है, उससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में शासन व्यवस्था में सख्ती, तेजी और जवाबदेही तीनों देखने को मिल सकती है। नई सरकार के इस शुरुआती एक्शन ने न केवल प्रशासनिक तंत्र को अलर्ट किया है, बल्कि जनता के बीच भी यह संदेश पहुंचाया है कि अब कामकाज की रफ्तार बढ़ने वाली है। हालांकि, असली परीक्षा आने वाले समय में होगी जब इन निर्देशों का असर जमीनी स्तर पर दिखेगा और यह स्पष्ट होगा कि सरकार अपने वादों पर कितना खरा उतर पाती है।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पहले ही दिन यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार काम करने के अंदाज में बदलाव लाने जा रही है और प्रशासन को जवाबदेह बनाते हुए विकास की रफ्तार को तेज करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सख्त और सक्रिय कार्यशैली का असर बिहार की तस्वीर और आम जनता की जिंदगी पर किस रूप में नजर आता है।

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